कंजूस ब्राह्मण का सत्तू घड़ा टूटा | Moral Story in Hindi | Panchtantra Kahani #HindiKahani #नैतिककथा #पंचतंत्र

कंजूस ब्राह्मण और सत्तु का घड़ा hindi kahaniya moral stories


एक छोटे से नगर में एक कंजूस ब्राह्मण रहता था, जिसका नाम था हरित। वह इतना किफायती था कि भिक्षा में मिले अनाज को भी चावल-दाल की तरह बचाकर रखता। एक दिन उसे भिक्षा में भरपूर सत्तू मिला। उसने थोड़ा-सा खाया और बाकी को एक मिट्टी के बड़े घड़े में भर लिया। घड़े को मजबूत रस्सी से बांधकर वह दीवार की खूंटी पर लटका दिया। उसके ठीक नीचे अपनी पुरानी खटिया डालकर वह लेट गया।

hindi kahaniyan
moral story in hindi 

hindi kahaniya moral stories

रात गहराने लगी थी, लेकिन हरित की नींद नहीं आ रही थी। सत्तू के घड़े को देखते-देखते उसके मन में स्वप्निल कल्पनाएँ दौड़ने लगीं। वह आँखें बंद करके हवाई महल बनाने लगा। सोचा, अभी तो देश में सब कुछ ठीक है, लेकिन जल्द ही अकाल पड़ जाएगा। तब इस सत्तू का दाम आसमान छू लेगा। एक मुट्ठी सत्तू के भी सौ-सौ रुपये मिलेंगे। इस घड़े से मुझे कम से कम दो सौ रुपये तो मिल ही जाएँगे।

उसने कल्पना की कि उन दो सौ रुपयों से वह दो मोटी-ताज़ा बकरियाँ खरीद लेगा। छह महीने में ये दो बकरियाँ चार हो जाएँगी, फिर आठ, फिर सोलह! उन्हें बेचकर मैं एक सुंदर गाय लूँगा। गाय के दूध से घी बनेगा, दही बनेगा, और पैसा कमाएगा। फिर गाय के बाद भैंसें खरीदूँगा – दो, चार, आठ भैंसें! उनके गोबर से खाद बनाऊँगा, दूध बेचूँगा, और धन बरसेगा।

हरित का स्वप्न और भी रंगीन होता गया। भैंसों से कमाए पैसे से घोड़े खरीदूँगा। मजबूत, तेज़-दौड़ने वाले घोड़े! उन्हें राजा-महाराजाओं को महँगे दामों में बेचूँगा। मेरे पास सोने-चाँदी का ढेर लग जाएगा। तब मैं एक विशाल हवेली बनवाऊँगा – चारों तरफ बाग-बगीचे, कुएँ, और सोने के झरोखे। पूरे नगर में मेरी दौलत की चर्चा होगी।

यह सोचते-सोचते हरित ने कल्पना की कि नगर के सबसे अमीर ब्राह्मण की खूबसूरत बेटी का विवाह मुझसे हो जाएगा। वह मेरी पत्नी बनेगी – गोरी-चिट्टी, आँखों में काजल, और हँसी इतनी मधुर कि दिल खुश हो जाए। उसके गर्भ से एक सुंदर पुत्र होगा। मैं उसका नाम रखूँगा सोमशर्मा। वह मेरा वारिस बनेगा, मेरी सारी संपत्ति का मालिक।

स्वप्न में हरित खुद को हवेली के घुड़शाला के पीछे की ऊँची दीवार पर बैठे देखने लगा। हाथ में पवित्र पुस्तक लिए वह सोमशर्मा की बाल-लीलाएँ देख रहा था। बच्चा अभी घुटनों के बल चलना सीख रहा था। अचानक सोमशर्मा अपनी माँ की गोद से उतरा और हरित की ओर लपका। हरित ने कल्पना में अपनी पत्नी से झल्लाकर कहा, अरे, अपने बच्चे को संभालो! कहीं गिर न जाए।

लेकिन पत्नी रसोई के काम में व्यस्त थी – चूल्हे पर रोटियाँ सेंक रही थी, दूध उबाल रही थी। उसकी आवाज़ तक न पहुँची। हरित क्रोधित हो गया। वह दीवार से उतरा और पैर उठाकर बच्चे को ठोकर मारने को हुआ। तभी वास्तविकता में उसका पैर हवा में उछला। खटिया पर लेटे-लेटे जोर से झटका लगा, और उसका पैर सीधा सत्तू के घड़े पर जा लगा!

'चट्ट!' की तेज़ आवाज़ के साथ घड़ा नीचे गिरा और चकनाचूर हो गया। सारा सत्तू फर्श पर बिखर गया – चूहों और दीमकों का भोजन बन गया। हरित की आँखें खुलीं। वह उछलकर बैठा। हाय-हाय करते हुए बोला, "मेरा सारा भाग्य बर्बाद! हवेली गई, घोड़े गए, सोमशर्मा गया!" रोते-बिलखते वह सत्तू चुनने लगा, लेकिन अब कुछ हाथ न आया।

सीख:- moral story in hindi 

 यह कहानी सिखाती है कि कंजूसी तो ठीक है, लेकिन हवाई कल्पनाओं में खो जाना मूर्खता है। वर्तमान में जीओ, भविष्य की चिंता छोड़ो। जो है, उसे संभालो, वरना हाथ से निकल जाएगा।

Post a Comment

Previous Post Next Post