Sparrow Elephant Moral Story in Hindi | एकता की शक्ति | Kids Panchtantra Kahani

 एक घने जंगल में, ऊँचे-ऊँचे पेड़ों की ओट में एक छोटी-सी गौरैया अपने पति के साथ खुशी-खुशी रहती थी। उनका छोटा-सा घोंसला एक मजबूत चीकू के पेड़ की ऊपरी डाल पर बना था, जहाँ हवा की ठंडी लहरें और सूरज की सुनहरी किरणें हमेशा पहुँचती रहतीं। गौरैया हाल ही में चार चमकीले अंडे दे चुकी थी। वह दिन-रात उनके ऊपर बैठी रहती, उन्हें अपनी गर्मी से सेती हुई, और बेसब्री से चूजों के निकलने का इंतज़ार करती। "अरे प्यारे, जल्दी ही हमारे छोटे-छोटे बच्चे हमारी गोद सजाएँगे," वह अपने पति से कहती, तो वह मुस्कुराते हुए जवाब देता, "हाँ प्रिये, बस थोड़ा और इंतज़ार। मैं रोज़ खाने का इंतज़ाम करूँगा।

Sparrow Elephant Moral Story in Hindi | एकता की शक्ति | Kids Panchtantra Kahani
Sparrow Elephant Moral Story in Hindi | एकता की शक्ति | Kids Panchtantra Kahani


एक धूप भरी सुबह, गौरैया अपने अंडों को से रही थी। उसका पति दाना-पानी लाने जंगल की ओर उड़ गया था। तभी जंगल में हलचल मच गई। एक विशालकाय, गुस्सैल हाथी तेज़ कदमों से आया। वह हमेशा जंगल को तहस-नहस करने का शौकीन था। चारों ओर पेड़-पौधे रौंदते हुए, झाड़ियाँ तोड़ते हुए वह चीकू के पेड़ तक पहुँचा। "हट जा मेरे रास्ते से!" गरजता हुआ हाथी ने सूंड से पेड़ को जोर-जोर से हिलाना शुरू कर दिया। पेड़ कितना ही मजबूत क्यों न हो, हिलने से गौरैया का घोंसला टूटकर नीचे गिर पड़ा। उसके सारे अंडे ज़मीन पर पटककर फूट गए। टूटे अंडों से चूजों के छोटे-छोटे टुकड़े इधर-उधर बिखर गए।


गौरैया नीचे उतरी तो उसका दिल टूट गया। वह जोर-जोर से विलाप करने लगी, "हाय मेरे बच्चे! हाय मेरी किस्मत! कौन है ये निर्दयी जोने मेरा सब कुछ छीन लिया?" तभी उसका पति लौटा। दाने की चोंच मुँह में लिए वह घोंसले की ओर उड़ा, लेकिन नीचे का मंजर देखकर उसके पंख ठिठक गए। "ये क्या हो गया? हमारे सपने... हमारे बच्चे!" वह दुख से काँप उठा। दोनों पति-पत्नी घंटों रोते रहे। फिर गौरैया ने कहा, "नहीं, हमें चुप नहीं बैठना चाहिए। इस हाथी को सबक सिखाना होगा। बदला तो लेंगे ही!" पति ने सहमति में सिर हिलाया, "हाँ, लेकिन हम तो छोटे-से हैं। चलो, अपने दोस्तों की मदद लें।


वे सबसे पहले अपने पुराने मित्र कठफोड़ेए के पास पहुँचे। कठफोड़आ लकड़ी पर चोंच मारकर सुरक्षित डेरा डाले बैठा था। गौरैया ने सारी व्यथा सुनाई। कठफोड़आ गुस्से से चोंच पीसते हुए बोला, "ये तो बहुत बुरा हुआ! चिंता मत करो, मेरे दो और दोस्त हैं—एक तेज़-तर्रार मधुमक्खी और एक चालाक मेंढक। हम सब मिलकर योजना बनाएँगे।" मधुमक्खी ने कहा, "मैं हाथी को भटकाऊँगी।" मेंढक ने हँसते हुए कहा, "और मैं उसे दलदल में फँसाऊँगा। मेरी पूरी पलटन तैयार है!


सभी ने मिलकर एक चतुर योजना बनाई। अगले दिन हाथी फिर जंगल में घूमने लगा। मधुमक्खी ने चुपके से उसके कान के पास उड़ान भरी और मीठा-मीठा गाना गुनगुनाने लगी—ज़嗡嗡嗡...। हाथी को लगा कोई जादुई संगीत है। "वाह, क्या मधुर स्वर!" वह कान हिलाने लगा और संगीत में डूब गया। इसी बीच कठफोड़आ ने मौका देखा। वह तेज़ी से उड़कर आया और अपनी तेज़ चोंच से हाथी की दोनों आँखें चोंच मार-मारकर फोड़ दीं। "आह! मेरी आँखें!" हाथी दर्द से चीखा, चूर-चूर हो गया। अब वह अंधा हो चुका था, इधर-उधर टटोलने लगा।


तभी मेंढक ने अपनी पूरी फौज को बुलाया। वे पास के दलदल के किनारे पहुँचकर जोर-जोर से टर्राने लगे—टेंक-टेंक, क्रोक-क्रोक! आवाज़ इतनी तेज़ थी कि जंगल गूँज उठा। अंधे हाथी को लगा, "पास ही कोई बड़ा तालाब है, पानी पी लूँ।" वह टटोलते हुए दलदल की ओर चला। पहले तो उसके पैर धँसे, फिर पूरा शरीर। "बचाओ! फँस गया!" वह चिल्लाया, लेकिन जितना छटपटाया, उतना ही गहराई में डूबता गया। धीरे-धीरे दलदल ने उसे निगल लिया। हाथी मर गया।


गौरैया दंपति और उनके दोस्त ऊँचे पेड़ पर बैठे ये नज़ारा देखकर खुश हुए। गौरैया ने कहा, "देखा, एकता में कितनी ताकत है!" कठफोड़आ ने हँसते हुए कहा, "हाँ, छोटे-छोटे जीव भी बड़े दुश्मन को हरा सकते हैं।


इस कहानी से सीख: हमें यह शिक्षा मिलती है कि दुनिया में कोई भी कमजोर नहीं होता। यदि छोटे-छोटे लोग या जीव एकजुट होकर, बुद्धि और योजना से काम करें, तो वे बड़े से बड़े शत्रु को भी पराजित कर सकते हैं। एकता ही सबसे बड़ी शक्ति है—यह न बच्चों के लिए, न बड़ों के लिए, बल्कि हर उम्र के लिए अनमोल सबक है।


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