राक्षस vs चोर! 😱 पंडित हरिशंकर की भैंसें Brahmarakshas Thief Moral Story Hindi चाणक्य नीति कहानी
एक छोटे से गाँव में पंडित हरिशंकर नाम का एक साधारण ब्राह्मण रहता था। वह रोज भिक्षा माँगकर अपना गुजारा करता था। न ठंड से बचने को गर्म कपड़े थे, न गर्मी से राहत देने को कुछ। एक दिन किसी दयालु ग्रामीण ने उस पर तरस खाकर दो मजबूत भैंसों का जोड़ा दे दिया। पंडित ने इन भैंसों की देखभाल बड़े लाड़-प्यार से की। आसपास के घरों से चावल, दाल, घी इकट्ठा करके उन्हें हमेशा पेट भर खिलाया। धीरे-धीरे दोनों भैंसें इतनी मोटी-ताजा हो गईं कि देखने वाले की आँखें फेर लें।
इन भैंसों को देखकर गाँव के ही एक लुटेरे का मन ललचा गया। उसने सोचा, 'इन्हें चुरा लूँगा और अमीर बन जाऊँगा।' फैसला करके वह रात को निकला। रास्ते में उसे एक भयानक सूरत वाला राक्षस मिला—लाल-लाल आँखें, नुकीले दाँत, बिखरे झुर्रीदार बाल और चमकती नाक। डरते हुए लुटेरे ने पूछा, "तू कौन है भाई?
राक्षस ने गरजकर कहा, "मैं ब्रह्मराक्षस हूँ। सात दिन से भूखा हूँ। उसी पंडित के घर जाकर उसे खा आऊँगा। तू भी उसी तरफ जा रहा है न? चल, साथ चलें।"
शाम ढलते ही दोनों छिपकर पंडित के झोपड़े में घुस गए। पंडित सो चुका था। राक्षस जब हमला करने को आगे बढ़ा, तो लुटेरा बोला, "रुक जा दोस्त! पहले मैं भैंसों को भगा लूँ, फिर तू जो करना है कर।
राक्षस ने नाराज होकर कहा, "पागल! चोरी करते वक्त शोर मच गया तो पंडित जाग जाएगा। मैं भूखा मर जाऊँगा। पहले तू रुक, मैं उसे खत्म करूँगा, फिर तू आराम से ले जाना।
लुटेरे ने जवाब दिया, "नहीं यार, तू मारते वक्त चूक गया तो पंडित जागकर पहरा दे देगा। मैं अपना माल कैसे ले जाऊँगा? पहले मुझे काम निपटा लेने दे।
ऐसी ही आपसी नोकझोंक चल रही थी कि शोर सुनकर पंडित चौंककर उठ बैठा। लुटेरा फटाक से बोला, "पंडित जी! ये राक्षस आपको मारने आया था, मैंने ही इसे रोका और बचाया।
राक्षस चिल्लाया, "झूठ बोलता है ये! पंडित जी, ये लुटेरा आपकी भैंसें चुराने आया था। मैंने ही आपको जगाया और बचाया।
यह सुनकर पंडित को सारी बात समझ आ गई। उसने डंडा उठाया और दोनों की ओर बढ़ा। खुद को खतरे में देखकर लुटेरा और राक्षस दोनों ही डरकर भाग खड़े हुए। पंडित ने अपनी भैंसें सुरक्षित रख लीं।
नैतिक शिक्षा: स्वार्थी लोग आपस में ही लड़ते रहते हैं, जिससे अच्छे लोगों को फायदा हो जाता है। सावधानी और बुद्धि से हर संकट टल जाता है।

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