King Turns Horse Moral Story in Hindi | Funny Chanakya Niti
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King Turns Horse Moral Story in Hindi |
प्राचीन काल में एक विशाल साम्राज्य पर बलशाली राजा विक्रमादित्य का शासन था। उनकी वीरता की धाक इतनी थी कि पड़ोसी राजा उनके चरणों में सिर झुकाते थे। उनका राज्य पहाड़ों से समुद्र तक फैला हुआ था। राजा के मुख्य सलाहकार विद्वान हरिप्रसाद भी शास्त्रों के ज्ञाता और बुद्धिमान थे। लेकिन उनकी पत्नी का स्वभाव बेहद उग्र था।
एक शाम घरेलू झगड़े में पत्नी इतना बिगड़ गई कि हरिप्रसाद ने हर तरह से मनाने की कोशिश की, लेकिन वह न मानी। आखिरकार उन्होंने कहा, "प्रियतम! तेरी खुशी के लिए मैं कुछ भी कर सकता हूं। जो तू कहेगी, वैसा ही होगा।" पत्नी ने कहा, "ठीक है। मेरा हुक्म मानो—अपना सिर ठीक करवा लो और मेरे पैर चूमकर माफी मांगो। तभी मैं मानूंगी।" हरिप्रसाद ने बिना हिचक वैसा ही किया। पत्नी खुश हो गई।
उसी रात राजा विक्रमादित्य की रानी भी नाराज हो गई। राजा ने कहा, "जान! तेरी नाराजगी मुझे असह्य पीड़ा देती है। तेरी प्रसन्नता के लिए मैं हर बलिदान देने को तैयार हूं। बोलो, क्या करूं?" रानी बोली, "मैं चाहती हूं कि तेरे मुंह में लगाम लगा दूं, तेरे ऊपर सवार होऊं और तू घोड़े की तरह चिल्लाता-हिनहिनाता दौड़े। तभी मैं शांत होऊंगी।" राजा ने तुरंत उनकी बात मान ली और रानी की इच्छा पूरी की।
अगली सुबह दरबार में जब हरिप्रसाद मुंडित सिर के साथ पहुंचे, तो राजा ने हंसते हुए पूछा, "ओ हरिप्रसाद! तूने ये नया लुक कब अपनाया? कौन सा शुभ मुहूर्त था?
हरिप्रसाद ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, "महाराज! मैंने उसी शुभ समय में सिर मुंडवाया है, जब राजा महाराज अपने मुंह में लगाम डालकर घोड़े की तरह हिनहिनाते दौड़ते हैं।
राजा का चेहरा लाल हो गया। सब हंस पड़े। इस घटना से सबको सीख मिली प्यार में आज्ञाकारी तो ठीक है, लेकिन विवेक कभी न खोना चाहिए।
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