The Dove and the Hunter – Short Moral Story in English for Kids | Atithi Devo Bhava Story

Children love bedtime stories that teach good values. Today we bring a heart-touching story of a dove couple and a hunter. This story teaches kindness, sacrifice and respect for guests.


एक जंगल के पास एक लालची और क्रूर शिकारी रहता था। उसका धंधा था जाल बिछाकर चिड़ियों को मारना और खाना। इस निर्दयी काम की वजह से उसके अपनों ने भी उसे छोड़ दिया था। अब वह अकेला ही, हाथ में जाल और डंडा लटकाए, जंगलों में भटकता रहता।

Dove and the Hunter short moral story for kids
Dove and the Hunter short moral story for kids



एक शाम उसके जाल में एक कबूतरिन फंस गई। उसे बांधे हुए जब वह अपनी झोपड़ी की ओर लौट रहा था, तो अचानक आकाश काले बादलों से भर गया। तेज बारिश शुरू हो गई। सर्द हवाओं से कांपते हुए शिकारी ने आसपास आश्रय तलाशा। थोड़ी दूर पर एक विशाल बरगद का पेड़ दिखा। उसके तने में गुफा जैसा खोखला था। अंदर घुसते हुए उसने चिल्लाया, "जो भी यहां रहता हो, मैं तेरी शरण में आया हूं। जो इस मुश्किल घड़ी में मेरी मदद करेगा, उसे मैं जीवनभर का कर्ज चुकाऊंगा।

उसी खोखले में वही कबूतर रहता था, जिसकी साथी को शिकारी ने जाल में फंसाया था। कबूतर अपनी पत्नी के बिना बिलख रहा था। अचानक पत्नी को देखकर उसका दिल खुशी से झूम उठा। कबूतरिन ने मन ही मन सोचा, 'मेरा सौभाग्य है कि मुझे इतना प्रेम करने वाला पति मिला। पति का स्नेह ही स्त्री का जीवन है। उसकी खुशी से ही हमारा जीवन धन्य होता है।' फिर उसने पति से कहा, "स्वामी! मैं यहीं हूं। इस शिकारी ने मुझे कैद कर लिया है। ये मेरे पुराने कर्मों का फल है। कर्म का फल तो भोगना ही पड़ता है। मेरी चिंता छोड़ो, अभी इस मेहमान की सेवा करो। अतिथि का अपमान करने वाले के सारे पुण्य उसके साथ चले जाते हैं, और पाप वहीं रह जाते हैं।

यह सुनकर कबूतर ने शिकारी से कहा, "डरो मत, महाशय! इस जगह को अपना घर समझो। बताओ, मैं तुम्हारी क्या मदद कर सकता हूं?

शिकारी बोला, "ठंड से मर रहा हूं, कोई उपाय करो।"

कबूतर ने पास की लकड़ियां जमा कीं और आग जला दी। बोला, "आग के पास बैठो, गर्म हो जाओ।

अब कबूतर को मेहमान के लिए खाने की फिक्र हुई। उसके घोंसले में एक दाना भी न था। सोचते-सोचते उसने फैसला किया कि अपना ही शरीर न्यौछावर कर देगा। यह ठानकर वह पवित्र कबूतर आग में कूद पड़ा। अपने प्रण को पूरा करने के लिए उसने खुद को बलि दे दिया।

शिकारी ने यह देखा तो दंग रह गया। उसके मन ने उसे कोसा। उसी पल उसने कबूतरिन को जाल से आजाद कर दिया और अपना सारा शिकार का सामान तोड़ फेंक दिया।

कबूतरिन ने पति को जलते देखा तो विलाप करने लगी। सोचा, 'पति के बिना जीवन का क्या मतलब? मेरा घर टूट चुका, अब किसके लिए जिऊं?' यह कहकर वह भी आग में समा गई। दोनों के बलिदान पर स्वर्ग से फूल बरसने लगे। शिकारी ने भी उसी दिन से हिंसा त्याग दी और प्राणीमात्र का सम्मान करने लगा।

नैतिक शिक्षा: अतिथि देवो भव। प्रेम, त्याग और सेवा से लोभ-क्रूरता भी पिघल जाती है।


Moral of the Story
Kindness and hospitality can melt even the hardest heart. We should always respect guests and help others in need.

FAQ Section 

Frequently Asked Questions

Q1. What is the moral of the dove and hunter story?
The moral is “Atithi Devo Bhava” — guests should be treated like God and kindness can change a person’s heart.

Q2. Is this story good for kids?
Yes, it is a perfect bedtime story for children to learn kindness and compassion.

Q3. Who changed the hunter’s heart?
The sacrifice and kindness of the dove couple changed the hunter’s heart.

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