चतुर व्यापारी का बदला तराजू चूहा बाज Chanakya Neeti Moral Story Hindi सेठ धोखा कहानी
एक बड़े शहर में रामलाल नाम का एक युवा व्यापारी रहता था। समय के साथ उसकी सारी दौलत खत्म हो गई। उसने फैसला किया कि दूर देश जाकर व्यापार शुरू करेगा। उसके पास एक मजबूत लोहे का तराजू था, जिसका वजन 20 किलो था और कीमत भी लाखों में। जाने से पहले उसने तराजू को पड़ोस के अमीर सेठ हरिप्रसाद के पास गिरवी रख दिया।
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कई दूर-दराज इलाकों में व्यापार करके रामलाल ने भारी मुनाफा कमाया और घर लौट आया। सेठ से अपना तराजू मांगने गया तो सेठ ने चालाकी से कहा, "भाई, तुम्हारा तराजू तो चूहों ने चट कर लिया। अब क्या करूं?" रामलाल ने गुस्सा दबाया, मन में योजना बनाई और बोला, "ठीक है सेठ जी, क्या हो सकता है! मैं नदी पर नहाने जा रहा हूं। कृपा कर अपने बेटे को मेरे साथ भेज दें, रास्ता भूल न जाऊं।"
चालाकी का खेल
सेठ डर गया कि कहीं रामलाल चोरी का इल्जाम न लगाए। उसने बेटे को भेज दिया। नहाने के बाद रामलाल ने सेठ के लड़के को पास की एक गहरी गुफा में छिपा दिया, मुंह पर पत्थर लगाकर बंद कर दिया और खाली हाथ सेठ के पास लौटा। सेठ ने पूछा, "मेरा बेटा?" रामलाल बोला, "नदी किनारे बैठे थे तभी एक विशालकाय बाज आया और उसे उड़ाकर ले गया।" सेठ गुस्से से लाल हो गया। "झूठ बोलते हो! इतना बड़ा लड़का कोई बाज कैसे ले जाएगा? लाओ मेरे बेटे को वरना राजा के पास जाऊंगा!"
रामलाल सहमत हो गया। दोनों राजा के दरबार पहुंचे। सेठ ने अपहरण का आरोप लगाया। राजा ने कहा, "लड़के को लौटा दो।" रामलाल ने अपनी बात दोहराई। राजा हंसे, "बाज इतने बड़े बच्चे को कैसे उड़ा लेगा?" रामलाल ने तपाक से जवाब दिया, "महाराज, अगर साधारण चूहे 20 किलो के लोहे के तराजू को खा सकते हैं, तो बाज भी सेठ के बेटे को क्यों नहीं उठा ले जा सकता?"
न्याय की जीत
राजा ने सेठ से सारा मामला पूछा। सेठ शर्म से पानी-पानी हो गया और सच कबूल कर लिया। राजा ने तराजू लौटाने का आदेश दिया, सेठ का बेटा गुफा से बाहर निकाला गया और दोनों को सौंप दिया। रामलाल ने साबित कर दिया कि बेईमानी का जवाब चतुराई से ही दिया जाता है।
नैतिक संदेश
यह कहानी सिखाती है कि बुराई का सामना बुद्धि से करना चाहिए, न कि गुस्से से। धोखेबाज को उसी की चाल से सबक सिखाएं।

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