Panchtantra Sea & Plover Story: Arrogance Lesson | Garuda Vishnu Moral Hindi Kahani
एक समुद्री किनारे पर एक टिटिहरी का जोड़ा रहता था। अंडे देने से पहले मादा टिटिहरी ने अपने पति से कहा, "कोई सुरक्षित जगह ढूंढ लो, क्योंकि ज्वार की लहरें सब कुछ बहा ले जाती हैं।

Panchtantra Sea & Plover Story: Arrogance Lesson | Garuda Vishnu Moral Hindi Kahani
नर टिटिहरी ने हंसकर कहा, "डर मत, समुद्र मुझसे डरता है। यहीं अंडे दे दो।
मादा बोली, "ज्वार की लहरें तो मतवाले हाथी को भी खींच ले जाती हैं। सावधानी बरतनी चाहिए।
लेकिन नर ने अभिमान से सुनी नहीं। समुद्र ने उनकी बातें सुन लीं और सोचा, "यह टिटिहरी इतना घमंडी है कि आकाश गिरे तो अपनी टांगों से थाम लेगा। इसका सबक सिखाना जरूरी है।" ज्वार आने पर उसने अंडे बहा दिए।
अगले दिन मादा लौटी तो अंडे गायब। वह रोई, "मैंने कहा था न! अभिमान में मेरी बात न मानने की सजा मिली। जो आगे की विपत्ति का इंतजाम न करे, वही नष्ट होता है।
नर बोला, "चिंता न कर, मैं समुद्र को अपनी चोंच से सुखा दूंगा!" वह पानी उछालने लगा।
मादा ने समझाया, "समुद्र से वैर मत करो। अपनी ताकत देखो, वरना पतंगे की तरह जल जाओगे। गंगा-यमुना जैसी नदियां इसे भरती रहती हैं, तेरी चोंच क्या कर लेगी?
नर न माना। मादा बोली, "फिर सब पक्षियों की मदद ले लो। छोटे प्राणी मिलकर बड़े को हरा देते हैं, जैसे चिड़िया, कठफोड़ा और मेंढक ने हाथी को हराया था।
नर ने बगुले, सारस, मोर आदि को बुलाया और दुख सुनाया। उन्होंने कहा, "हम कमजोर हैं, लेकिन गरुड़ मदद करेगा।
सब गरुड़ के पास गए और चिल्लाए, "महाराज, समुद्र ने टिटिहरी के अंडे बहाए। कल हम सबके नष्ट कर देगा!
गरुड़ गुस्से में था कि तभी विष्णु का दूत आया। गरुड़ ने कहा, "भगवान को बोलो, दूसरी सवारी लें। समुद्र ने अपमान किया है।
दूत ने विष्णु को बताया। भगवान खुद आए और गरुड़ से बोले, "तुम्हारा गुस्सा जायज है। चलो, अंडे वापस दिलाते हैं।
विष्णु ने धनुष पर अग्नेय बाण चढ़ाया और समुद्र से धमकाया, "अंडे लौटा दे, वरना सुखा दूंगा!
समुद्र डर गया और अंडे तुरंत लौटा दिए। सब खुश हुए, और कहानी का संदेश मिला—अभिमान नाश करता है, दूरदृष्टि और एकता बचाती है।
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