अपना गांव ही सबसे अच्छा | Chandu Kutte Ki Kahani | Moral Story in Hindi
एक हरे-भरे घाटी वाले छोटे से गांव में चंदू नाम का एक साहसी कुत्ता रहता था। चंदू लंबी पूंछ वाला, चमकदार काला कुत्ता था, जो हमेशा गांव के अन्य कुत्तों के साथ खेला-कूद करता। लेकिन एक दिन अचानक भयंकर सूखा आ गया। नदियां सूख गईं, खेत काले पड़ गए, और भोजन का नामोनिशान मिट गया। भूख से तड़पते हुए कई कुत्ते मर गए। चंदू के दोस्त भी एक-एक करके कमजोर होते चले गए।
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चंदू ने सोचा, 'इस भूखमरी से तो बेहतर है कहीं और चला जाऊं।' वह रात के अंधेरे में निकल पड़ा। कई दिनों की पैदल यात्रा के बाद वह पड़ोस के अमीर गांव पहुंचा। वहां खेतों में फसलें लहलहा रही थीं, और घरों से स्वादिष्ट खाने की महक आ रही थी। चंदू ने एक बड़े घर में चुपके से घुसकर ताजी रोटियां, दूध और मांस का मजा लिया। उसका पेट भर गया, और वह खुश हो गया।
घर के मालिक, एक दयालु किसान, ने उसे देखा भी लेकिन मुस्कुराकर कहा, 'जा बेटा, भरपेट खा ले।' लेकिन जैसे ही चंदू घर से बाहर निकला, आसपास के 20-25 कुत्ते भौंकते हुए उसे घेर लिया। वे गांव के राजा-रानी कुत्ते थे – बड़े, तेज दांतों वाले, और आंखों में आग। 'तू परदेशी चोर है! हमारे इलाके में घुसा है!' चिल्लाते हुए उन्होंने हमला बोल दिया।
भयंकर लड़ाई छिड़ गई। चंदू ने पूरा जोर लगाया, लेकिन संख्या में कम होने से उसके शरीर पर कई गहरे घाव लग गए। खून बहने लगा, पैर लंगड़ाने लगे। आखिरकार वह भागा और जंगल में छिप गया। रात भर दर्द से कराहता रहा। सुबह उठकर उसने मन में ठान लिया, 'मेरा अपना गांव ही स्वर्ग है। वहां भूख है, लेकिन दोस्त हैं। यहां तो भोजन है, पर जान के दुश्मन!'
कई दिनों की मशक्कत से चंदू अपने गांव लौटा। गांव के कुत्ते उसे देखकर दौड़े, 'चंदू भाई! तू कहां गायब था? दूसरे गांव का राज़ खोल ना। वहां के लोग कैसे हैं? खाने को क्या-क्या मिला? बताओ सब!'
चंदू ने थके हुए लहजे में कहा, 'मित्रों, वह गांव तो जन्नत जैसा है। खाने-पीने की हर चीज – रोटी, दाल, मांस, दूध – सब ताजा और स्वादिष्ट। घरवाली महिलाएं इतनी कोमल हैं कि कभी डांटती तक नहीं। लेकिन एक भयानक कमी है... अपनी ही जाति के कुत्ते बेहद खूंखार और जंगली हैं। वे परदेशियों को देखते ही फाड़ खाने को तैयार रहते हैं। इसलिए, अपना गांव ही सबसे अच्छा है – भूख सह लेंगे, लेकिन दुश्मनों से नहीं डरेंगे!'
गांव के सारे कुत्ते चंदू की बात सुनकर सिर हिला दिए। उस दिन से सबने मिलकर सूखे का सामना करने का फैसला किया। चंदू का यह अनुभव सबके लिए सबक बन गया।
नैतिक शिक्षा: अपनी जगह की कीमत कभी न भूलो। बाहर की चमक अक्सर धोखा देती है।

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